Friday, April 23, 2010

इस्लाम धर्म के पांच महत्वपूर्ण स्तम्भ

इस्लाम में पांच बातों के बारे में ये कहा गया है कि ये इस्लाम के पांच स्तम्भ है. इन पाँचों स्तंभों
में से एक भी स्तम्भ ढह जाये तो इस्लाम की पूरी इमारत ढह जाती है. कहने का मतलब ये है कि
जब तक इन पांचो स्तंभों पर पूर्ण विश्वास और पालन न किया जाए कोई व्यक्ति पूर्ण रूप से इस्लाम
का अनुयायी नहीं माना जायेगा.इन पाँचों स्तंभों पर पूर्ण विश्वास और उनका पालन प्रत्येक मुसलमान
पर अनिवार्य है.
१. ईमान या विश्वास-ये इस्लाम का सबसे पहला और महत्वपूर्ण स्तम्भ है.इस बात पर पूर्ण विश्वास
कि ''इबादत (पूजा-उपासना) के योग्य केवल ईश्वर है.उसके अलावा और कोई इबादत के योग्य नहीं और
हजरत मुहम्मद सल्ल: ईश्वर के पैगम्बर व रसूल है''.इसे इस्लाम का द्वार कहा गया है.जब तक इस बात
पर पूर्ण विश्वास न हो तब तक मनुष्य का कोई भी कर्म स्वीकार्य नहीं है.इसके अलावा इस्लाम के अनुयायी
को इन बातों पर भी पूर्ण विश्वास होना अनिवार्य है कि ईश्वर एक है. ईश्वर सृष्टि का रचियता है. ईश्वर के
भेजे गए सभी दूत सत्य है.हजरत मुहम्मद सल्ल: ईश्वर के अंतिम दूत है. ईश्वर द्वारा रसूलों पर भेजी गयी
सभी आसमानी किताबें(धर्मग्रन्थ) सत्य है.कुरआन अंतिम ईश्वरीय ग्रन्थ है. फरिश्तों का अस्तित्व है.
अच्छी या बुरी किस्मत ईश्वर की देन है. एक दिन प्रलय ज़रूर आएगा और ईश्वर के आज्ञाकारीओं को
स्वर्ग मिलेगा और दुष्टों व पापीयों को नरक मिलेगा.
२. नमाज़-इस्लाम का दूसरा महत्वपूर्ण स्तम्भ है.नमाज़ एक विशेष प्रकार की इबादत(पूजा) है. प्रत्येक
मुसलमान स्त्री पुरुष पर दिन में पांच बार निर्धारित समय पर नमाज़ पढना अनिवार्य है.
३. रोज़ा-सुबह सूरज उदय होने से लेकर शाम को सूर्यास्त तक अपने आपको पूरी तरह खाने पीने और
सम्भोग से रोकने का नाम रोज़ा है. प्रत्येक मुसलमान स्त्री पुरुष को साल में एक बार पूरे एक महीने के
रोज़े रखना अनिवार्य है.
४. ज़कात-हर साल अपनी धन दौलत,माल सामान,सोने चांदी आदि में से इस्लाम द्वारा निर्धारित हिस्सा
गरीबों को दान देना ज़कात कहलाता है. ज़कात हर उस मुसलमान पर अनिवार्य है जिसके पास इस्लाम
द्वारा निर्धारित रूपया पैसा,माल सामान,खेतीबाड़ी,जानवर,सोना चांदी आदि हो.
५. हज-प्रत्येक मुसलमान स्त्री पुरुष पर जीवन में एक बार पवित्र शहर मक्का जो सउदी अरब में स्थित है
की यात्रा करना अनिवार्य है.इसे हज कहते है. हज उसी पर अनिवार्य है जो मक्का शहर की यात्रा का आर्थिक
रूप से सामर्थ्य रखता हो.

1 comments:

Rasheed Sayyad said...

app ne jo likha am admee ko dhan me rakhkar likha jo aasanise log samzenge

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